अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में बैन करने की तैयारी! प्रशासन ने दूसरा नोटिस भेजा
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर उन्हें दूसरा नोटिस जारी किया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पीछे चिपकाया गया है, जिसमें लिखा है कि मौनी अमावस्या वाले दिन इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे गए पांटून पुल पर लगाए गए बैरियर को उन्होंने तोड़ दिया और बिना अनुमति बग्घी के साथ संगम की तरफ बढ़ने की कोशिश की। उस दौरान संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी, जिससे भगदड़ की आशंका पैदा हो गई और व्यवस्था बिगड़ गई।
जवाब के लिए 24 घंटे का दिया समय
नोटिस में प्रशासन ने पूछा है कि उनके इस आचरण के चलते उन्हें हमेशा के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित क्यों न कर दिया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर 24 घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो शंकराचार्य संस्था को दी गई जमीन व सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं और भविष्य में मेला क्षेत्र में आने से रोका जा सकता है।प्रशासन ने एक और मुद्दा उठाया है। मेले में खुद को ‘शंकराचार्य’ बताते हुए बोर्ड लगाने पर। नोटिस में कहा गया है कि यह अदालत के आदेश का उल्लंघन माना जा सकता है।
मेल से भिजवाया था 8 पन्नों का जवाब
इससे पहले मंगलवार सुबह 8 बजे कानूनगो अनिल कुमार के जरिए प्रशासन ने पहला नोटिस शिविर के गेट पर चस्पा कराया था। उसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य घोषित कैसे कर लिया। उसी रात करीब 10 बजे अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से 8 पन्नों का जवाब भेजा गया, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो मानहानि का मामला दायर करेंगे।