
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश के अंशकालिक शिक्षकों ने गुरुवार को निदेशक, समाज कल्याण विभाग को एक प्रार्थना-पत्र सौंपकर अपने नवीनीकरण (Renewal) के संबंध में शीघ्र एवं न्यायोचित निर्णय लेने की मांग की। शिक्षकों ने कहा कि वे लंबे समय से विभाग में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनके नवीनीकरण के संबंध में कोई स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।
प्रार्थना-पत्र में शिक्षकों ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद संबंधित प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। लगातार केवल मौखिक आश्वासन मिलने से शिक्षक मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
शिक्षकों ने विभाग से अनुरोध किया कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आवश्यक विभागीय कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया लंबित है तो उसकी स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि अनिश्चितता की स्थिति समाप्त हो सके।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नवीनीकरण में हो रही देरी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विभाग में यदि इन पदों की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है तो पूर्व से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों का नवीनीकरण विभाग, विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था—तीनों के हित में होगा।
अंशकालिक शिक्षकों ने यह भी उल्लेख किया कि अनेक महिला शिक्षक अपने परिवार से दूर रहकर सेवाएं दे रही हैं तथा अधिकांश शिक्षकों के परिवार की आजीविका इसी रोजगार पर निर्भर है। ऐसे में नवीनीकरण में अनावश्यक विलंब कई परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बन रहा है।
ज्ञापन के अंत में शिक्षकों ने निदेशक से विद्यार्थियों के हित, विभागीय आवश्यकता, मानवीय परिस्थितियों तथा उच्च न्यायालय के आदेशों को ध्यान में रखते हुए नवीनीकरण के संबंध में शीघ्र, स्पष्ट, न्यायसंगत एवं सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। ज्ञापन पर कई अंशकालिक शिक्षकों के हस्ताक्षर भी किए गए।




