लखनऊ पुलिस का बड़ा साइबर एक्शन: विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार!

लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की पूर्वी जोन सर्विलांस/क्राइम टीम और थाना विभूतिखंड पुलिस ने ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए विदेशी नागरिकों को साइबर ठगी का शिकार बनाने वाले फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सहित चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 31 लैपटॉप, 32 कंप्यूटर मॉनिटर, 14 मोबाइल फोन, 2 राउटर और ₹18.50 लाख नकद समेत बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह फर्जी “Apple Customer Support” वेबसाइट और VOIP सिस्टम के जरिए मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को अपना निशाना बनाता था। आरोपी खुद को अमेरिकी सरकारी अधिकारी, FTC अधिकारी और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते-धमकाते थे और उनसे धन उगाही करते थे। गिरोह ने गूगल विज्ञापनों के माध्यम से फर्जी कस्टमर सपोर्ट नंबर 000 800 100 9009 को प्रमुखता से प्रदर्शित कर लोगों को अपने जाल में फंसाया।
22-23 जुलाई की रात हुई कार्रवाई
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि विभूतिखंड क्षेत्र स्थित साइबर हाइट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पूर्वी जोन की सर्विलांस/क्राइम टीम और थाना विभूतिखंड पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
सूरज त्रिपाठी (मास्टरमाइंड)
विवेक पाण्डेय
राहुल त्रिपाठी
आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिकी
पुलिस के मुताबिक सूरज त्रिपाठी पहले अहमदाबाद में कॉल सेंटर में डायलर के रूप में काम कर चुका था। बाद में उसने अपने रिश्तेदारों और तकनीकी विशेषज्ञ की मदद से यह फर्जी नेटवर्क खड़ा किया।
ऐसे करते थे ठगी
गिरोह VOIP कॉलिंग के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क करता था। पहले कॉल एजेंट पीड़ितों का भरोसा जीतते और फिर कॉल “क्लोजर” को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इसके बाद आरोपी खुद को अमेरिकी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी दस्तावेज भेजते, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते तथा हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन वसूलते थे।
देशभर से भर्ती किए गए थे एजेंट
जांच में पता चला कि कॉल सेंटर में 35 एजेंट काम कर रहे थे, जिन्हें उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों से भर्ती किया गया था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS, आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।




