LDA में आधे से ज्यादा भवन मानचित्र हो रहे निरस्त, एक साल की रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल!

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट ने भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आम लोगों के लिए भवन मानचित्र पास कराना अब भी आसान नहीं हो पाया है और बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।
एलडीए के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए कुल 4,006 नए आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से केवल 2,074 मानचित्रों को मंजूरी दी गई, जबकि 1,514 आवेदन निरस्त कर दिए गए। इसके अलावा 40 आवेदन अब भी लंबित हैं। आंकड़े बताते हैं कि कुल आवेदनों में आधे से अधिक मामलों में लोगों को राहत नहीं मिल सकी।
वहीं शमन (रेगुलराइजेशन) प्रक्रिया की स्थिति भी संतोषजनक नहीं दिखी। रिपोर्ट के अनुसार, शमन के लिए कुल 1,115 आवेदन आए, लेकिन इनमें से सिर्फ 160 आवेदनों को ही स्वीकृति मिल पाई। इससे लोगों में प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद एलडीए की कार्यप्रणाली, मानचित्र पास कराने में होने वाली देरी और तकनीकी आपत्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आम नागरिकों का कहना है कि भवन निर्माण से जुड़े मामलों में नियमों की जटिलता और लंबी प्रक्रिया लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
हालांकि एलडीए का कहना है कि केवल मानकों और नियमों के अनुरूप पाए जाने वाले आवेदनों को ही स्वीकृति दी जाती है। जिन मामलों में मानक पूरे नहीं होते या दस्तावेजों में कमी होती है, उन्हें नियमानुसार निरस्त किया जाता है।
अब यह रिपोर्ट शहर में भवन निर्माण व्यवस्था और एलडीए की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ रही है।




