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ओमप्रकाश राजभर को बड़ा झटका, सुभासपा प्रदेश अध्यक्ष प्रेम चंद्र कश्यप वीआईपी में शामिल!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम चंद्र कश्यप ने पार्टी से नाता तोड़ते हुए बिहार के पूर्व मंत्री और वीआईपी पार्टी प्रमुख Mukesh Sahani की पार्टी विकसशील इंसान पार्टी (VIP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसे SBSP प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री Om Prakash Rajbhar के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

इसी दौरान पूर्व मंत्री अच्छे लाल निषाद ने भी वीआईपी पार्टी का दामन थाम लिया। दोनों नेताओं के शामिल होने से यूपी में वीआईपी पार्टी की सक्रियता और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को नई ताकत मिलने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि वीआईपी पार्टी अब निषाद, कश्यप और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

संगठन में बढ़ सकता है असंतोष

प्रेम चंद्र कश्यप लंबे समय से SBSP में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना राजभर के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर असंतोष और अंदरूनी खींचतान बढ़ रही थी।

गठबंधन की राजनीति के केंद्र में रहे हैं राजभर

Om Prakash Rajbhar उत्तर प्रदेश की पिछड़ा वर्ग राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई बार गठबंधन बदले हैं। कभी समाजवादी पार्टी के साथ रहे राजभर बाद में भाजपा के साथ आ गए और वर्तमान में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए छोटी जातीय और क्षेत्रीय पार्टियां अभी से अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गई हैं। ऐसे में प्रेम चंद्र कश्यप और अच्छे लाल निषाद का वीआईपी में जाना आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

यूपी में विस्तार की तैयारी में वीआईपी

बिहार की राजनीति में “सन ऑफ मल्लाह” के नाम से पहचान रखने वाले Mukesh Sahani अब उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। वीआईपी पार्टी लगातार अतिपिछड़ा और मछुआरा समाज के नेताओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर Om Prakash Rajbhar की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे SBSP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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