
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि देश में अब ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू’ करने पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है।
सुनवाई के दौरान ‘जस्टिस जॉयमाल्य बागची’ ने कहा कि यदि अदालत सीधे तौर पर पर्सनल लॉ को अमान्य घोषित कर देती है तो इससे एक कानूनी शून्य (Legal Vacuum) की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में यह बेहतर होगा कि इस मुद्दे को विधायिका के विवेक पर छोड़ा जाए, ताकि संसद इस विषय पर विचार कर समान नागरिक संहिता से जुड़ा स्पष्ट कानून बना सके।
अदालत की इस टिप्पणी को देश में लंबे समय से चल रही यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों, समानता और संवैधानिक व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है।




