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मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद का आश्वासन, इलाज के बाद लाखों की वसूली का आरोप।

लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप, राहत कोष के भरोसे इलाज शुरू कराने के बाद बढ़ा भुगतान का दबाव?

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के एक निजी अस्पताल पर मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन देकर मरीज का इलाज शुरू करने और बाद में लाखों रुपये की वसूली करने का आरोप सामने आया है। मामला लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल का बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय सर्वेश कुमार को इलाज के लिए लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता प्राप्त करने के लिए मरीज के इलाज का एस्टीमेट बनाकर दिया गया। परिजनों को राहत कोष से आर्थिक सहायता मिलने का आश्वासन देते हुए इलाज शुरू कर दिया गया।

परिजनों का दावा है कि इलाज के दौरान उनसे अब तक करीब 3.50 लाख रुपये लिए जा चुके हैं। इसके बावजूद मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से करीब 2 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं।

मामले में एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि परिजनों के अनुसार जिस अस्पताल ने मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के लिए एस्टीमेट उपलब्ध कराया, वह कथित तौर पर सरकार द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे में सवाल है कि यदि अस्पताल सरकारी योजना के तहत सूचीबद्ध नहीं है तो मरीज के परिजनों को राहत कोष से सहायता मिलने का आश्वासन किस आधार पर दिया गया।

मरीज फिलहाल लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल की प्रथम मंजिल स्थित निजी वार्ड के कमरा नंबर 108 में भर्ती बताया जा रहा है। परिजनों ने अस्पताल से इलाज और भुगतान का स्पष्ट हिसाब तथा राहत कोष से मिलने वाली सहायता की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, यदि राहत कोष के नाम पर मरीज के परिजनों को गलत जानकारी देकर भुगतान कराया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

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