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गोशालाओं से बनेगी जैव ऊर्जा, बलरामपुर के तुलसीपुर में CBG प्लांट लगाने की तैयारी!

BPCL ने उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के सामने रखा प्रस्ताव, गोबर और जैव-अवशेषों से CBG उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा!

लखनऊ, 11 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर और अन्य पशुधन जैव-अवशेषों के वैज्ञानिक एवं आर्थिक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने बलरामपुर के तुलसीपुर ग्राम में Compressed Bio-Gas (CBG) प्लांट स्थापित करने में रुचि दिखाई है।

इसी सिलसिले में मंगलवार को BPCL की टीम ने उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश में CBG के उत्पादन, संग्रहण, शुद्धिकरण और विपणन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में BPCL के हेड हेमंत जी. पाटिल तथा GIZ की ओर से संतोष सहाने भी मौजूद रहे।

गोबर से तैयार होगी CBG

BPCL की टीम ने बताया कि गोशालाओं में उपलब्ध गोबर और स्थानीय जैव-अवशेषों से बायोगैस तैयार कर उसे वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से शुद्ध करके CBG में परिवर्तित किया जा सकता है। तैयार CBG का इस्तेमाल वाहनों में CNG के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा पेट्रोल पंपों के माध्यम से इसके विपणन की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।

पहले से लगे बायोगैस प्लांट भी नेटवर्क से जुड़ेंगे

बैठक में BPCL की ओर से यह भी बताया गया कि जिन गोशालाओं में पहले से बायोगैस संयंत्र स्थापित हैं, वहां उत्पादित गैस को शुद्ध करके सिलेंडरों में भरा जा सकता है। इसके लिए शुद्धिकरण इकाई को वाहन पर स्थापित कर अलग-अलग गोशालाओं से गैस एकत्र करने और उसे निर्धारित केंद्रों तक पहुंचाने का नेटवर्क विकसित किया जा सकता है।

इस मॉडल के जरिए विभिन्न गोशालाओं में लगे बायोगैस संयंत्रों को एक स्थानीय जैव-ऊर्जा नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे गोबर और पशुधन से निकलने वाले जैव-अवशेषों का स्थानीय स्तर पर बेहतर उपयोग हो सकेगा।

गोशालाओं की आय बढ़ाने पर जोर

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय उसे ऊर्जा और आर्थिक संसाधन के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गोशालाओं को जैव-ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने वाले व्यावहारिक मॉडल विकसित होने से एक ओर गोवंश संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गोशालाओं की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

अपर मुख्य सचिव से भी हुई मुलाकात

बैठक के बाद BPCL की टीम ने पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम से भी मुलाकात की और बलरामपुर के तुलसीपुर में प्रस्तावित CBG परियोजना के संबंध में जानकारी साझा की।

अपर मुख्य सचिव ने प्रस्तावित परियोजना के लिए आवश्यक सहयोग और समन्वय का आश्वासन दिया। साथ ही गोशालाओं में उपलब्ध जैव-अवशेषों के बेहतर उपयोग और जैव-ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

तुलसीपुर में प्रस्तावित परियोजना को अमल में लाया जाता है तो यह उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को जैव-ऊर्जा उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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