बुर्के में कांवड…भड़के मौलान! बताया शरियत के खिलाफ

उत्तर प्रदेश के सम्भल में बुर्का पहने दो मुस्लिम महिलाओं के कांवड़ लेकर शिव मंदिर में जलाभिषेक की तैयारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं, वहीं बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजबी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात) ने इसे शरियत के खिलाफ बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में दूसरे मजहब के धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना “नाजायज” है और मुस्लिम समाज से ऐसे कदमों से बचने की अपील की। वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत आस्था पर नई बहस छिड़ गई है। आप क्या सोचते हैं—क्या व्यक्तिगत आस्था को धर्म की सीमाओं से ऊपर माना जाना चाहिए, या परंपराओं का पालन जरूरी है?




