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शंकराचार्य के बयान से गरमाई सियासत “पहले मारो फिर करो सम्मान?”

माघ मेले में बटुकों के साथ कथित बदसलूकी के मामले ने अब बड़ा सियासी और धार्मिक रूप ले लिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों के ‘सम्मान’ को दिखावा बताते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा—“पहले मारते हो, फिर फूल चढ़ाते हो”, यह स्वीकार्य नहीं है। वहीं सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने भी पाठक के इस्तीफे की मांग कर दी है। बढ़ते विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 मार्च को लखनऊ कूच का ऐलान किया है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और गर्माने के संकेत हैं। क्या सिर्फ सम्मान समारोह से ऐसे मामलों का समाधान हो सकता है, या सख्त कार्रवाई जरूरी है?




