राम मंदिर में विराजेगी 400 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण, संस्कृत विश्वविद्यालय ने सौंपी दुर्लभ प्रति

अयोध्या के राम मंदिर में 400 वर्ष पुरानी वाल्मीकि रामायण की एक दुर्लभ प्रति प्रतिष्ठित की जाएगी। यह ऐतिहासिक ग्रंथ दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा गया है। खबरों के मुताबिक, वाल्मीकि रामायण की यह दुर्लभ पांडुलिपि अब तक राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में संरक्षित थी, जिसे अब मंदिर को समर्पित किया गया है।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि इस रामायण को मंदिर परिसर में (संभवतः द्वितीय तल के गर्भगृह में) स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर प्रदान करना है।
इसके अलावा, कांची कामकोटि पीठ द्वारा भेंट किया गया ‘राम यंत्र’ भी मंदिर में स्थापित किया जाएगा। ट्रस्ट ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में रामायण की अन्य प्राचीन और प्रामाणिक पांडुलिपियों को भी विशेषज्ञों की जांच के बाद मंदिर में संरक्षित करने के लिए एक अभियान चलाया जाएगा।



