
World Economic Forum 2026: दावोस में चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 की बैठक के दौरान फ्रांस और चीन के बीच टेक जगत को लेकर तनाव खुलकर सामने आ गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक व्यापार संतुलन, सब्सिडी और निवेश को लेकर चीन को कठघरे में खड़ा कर दिया, जिसका जवाब भी ड्रैगन ने बिना देरी किए दिया है. इस बयानबाज़ी ने न सिर्फ यूरोप-चीन संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अमेरिका, चीन और यूरोप के बीच चल रही ट्रेड वॉर की भी सामने लाया है.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम यानी WEF 2026 की मीटिंग में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चीन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. WEF के मंच से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के चीन पर दिए गए बयान ने ग्लोबल पॉलिटिक्स और ट्रेड वॉर की बहस को बढ़ा दिया है. चीन को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की खुली टिप्पणी पर अब बीजिंग ने भी दो टूक जवाब दे दिया है. अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूरोप की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं- क्या यूरोप दोनों महाशक्तियों के बीच फंसता नजर आ रहा है? या फिर अपनी अलग आर्थिक रणनीति बना रहा है? मैक्रों के बयान और चीन की प्रतिक्रिया ने ग्लोबल ट्रेड में एक नए टकराव का संकेत दे दिया है.
सिर्फ एक्सपोर्ट से काम नहीं चलेगा
दावोस के मंच से मैक्रों ने चीन को यूरोपीय मार्केट में इन्वेस्ट करने का न्योता तो जरूर दिया लेकिन साथ ही बड़ी शर्तें भी रख दीं. मैक्रों ने कहा कि यूरोप को चीन से सिर्फ सस्ते प्रोडक्ट्स और डिवाइस नहीं चाहिए बल्कि ऐसी टेक्नोलॉजी और निवेश चाहिए जिससे यूरोप का भी विकास हो. राष्ट्रपति मैक्रों ने इस दौरान चीनी कंपनियों पर आरोप भी लगाए, जिसमें कहा कि चीनी प्रोडक्ट्स के स्टैंडर्ड अक्सर यूरोपीय मानकों से मैच नहीं करते हैं. चीन अपने प्रोडक्ट्स को भारी सब्सिडी देता है जिससे यूरोपीय कंपनियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. चीन की एक्सेस कैपेसिटी यानी जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन पूरी दुनिया के मार्केट पर बुरा असर डाल रही है.




