
चीन, रूस, ईरान और कई ब्रिक्स देशों के जंगी जहाजों ने 9 से 16 जनवरी तक नौसैनिक अभ्यास किया था। ब्रिक्स देशों का यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में उसके समुद्री तट पर किया गया। हालांकि ब्रिक्स के अहम सदस्य भारत के इसमें शामिल ना होने का फैसला लिया। अब दक्षिण अफ्रीका में ही इस अभ्यास पर बवाल शुरू हो गया है। दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स देशों के जॉइंट नेवल ड्रिल में ईरान की भागीदारी की जांच शुरू की है। ईरान की हिस्सेदारी को कथित तौर पर राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के आदेशों के खिलाफ बताया गया है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ अफ्रीका नियमित रूप से रूस और चीन के साथ ड्रिल करता है लेकिन यह अभ्यास ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका का ईरान के साथ तनाव चरम पर था। ईरान में उस समय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे और अमेरिकी राष्ट्रपति इनमें दखल की धमकी दे रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स के आलोचक रहे हैं और नौसैनिक अभ्यासों की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में अभ्यास ने उनका गुस्सा बढ़ा दिया।




